ध्यान सुखदाई है
“Meditation is Soothing”
(Motivational Thoughts)
ध्यान मनुष्य को तरह तरह से सुख देता है। जहां एक ओर ध्यान मनुष्य को सजग करता है। अप्रमाद का कारण बनता है वहीं दूसरी ओर ध्यान से सहनशीलता बढ़ती है मनुष्य संयमी बनता जाता है।
ध्यान जहां एक ओर मनुष्य के बंधन तोड़ता है वहीं दूसरी ओर ध्यान मनुष्य को सत्य से जोड़ता है। परमार्थ से जोड़ता है। ध्यान से ही श्रद्धा और विश्वास का बीज फलित होता है।
ध्यान मनुष्य को अनावश्यक विचारों से मुक्त करता है।ध्यान ही है जो मनुष्य को विकारों से भी मुक्त करता है। बिना ध्यान के मनुष्य का मन चारों दिशाओं में दिन रात दौड़ता रहता है। उसका कोई पारमार्थिक लक्ष्य नहीं होता। वह संसार में दौड़ता हुआ आशा तृष्णा को पूरा करने में ही अपना पूरा जीवन गंवा देता है।
सभी ज्ञानियों ने, बुद्धों ने ध्यान से बड़ा संसार में कुछ करने को है ही नहीं, इस बात की ही वकालत की है। ध्यान ही सच्ची कमाई है, धन है जो कभी किसी भी चोर लुटेरे द्वारा छीनी, लूटी नहीं जा सकती और निरंतर अभ्यास से बढ़ती ही जाती है।
ध्यान मुक्ति का कारण बनता है। सांसारिक नश्वरता को समझने का उससे ऊपर उठने, वैराग्य का कारण बनता है। ध्यान ही सहजता देता है। किसी भी बीमारी का एक मात्र हल है ध्यान।
ध्यान से ही आत्मभाव, अहम, अहंकार का नाश होता है। वर्तमान में जीने की कला ध्यान ही सिखाता है।भूत के दुख से मुक्ति और भविष्य की कल्पना से बचे रहना केवल ध्यान से ही संभव है।