अकथ कहानी जीवन की
” The Untold Story of Life”
( Hindi Poetry)
जैसे जैसे हम खोते जाएंगे
वैसे वैसे हम पाते जाएंगे
यह अदभुत लीला है
खुद को खोकर
खुद को ही पा लेने की….
मन को खोया
आशा तृष्णा इच्छा को खोया
खालीपन के उस भंवर में
अचरज जगमग करते
मोती को पाया…..
चुपके चुपके दबे पांवों से
चींटी जैसे चलते ही जाना है
अविरल लयबद्ध हो
चलते चलते रुक जाना है…..
उस रुकने में भी चलना होता है
गति असीम अपार अकथ की
अंतर ज्योति में बहते जाना है
धीरे धीरे घुलते मिलते जाना है……
सब मिट जाएगा जीवन में
ऐसा पल भी आएगा
रह जाएगा वही अमिट
जो जगमग जगमग करता ही रहता है
जीवन से मृत्यु तक के अगिनत
गीत सुनाते रहता है…….
कब से हैं हम नहीं पता
अंत हमेशा ही नई कड़ी ले आता है
हम मरते रहते हैं फिर पैदा होने को
यही अकथ कथा है
सारे मानव जीवन की…….
सच में मर सकें,
मरने के दर्द को सह सकें
नित्य पान कर सकें
उस अमृत का
जो अंतर में सदा
अविरल
बहते जाता है
अमर पद तक ले जाता है “तुराज़”