🙏 Turaaj की ओर से आप सबको हार्दिक प्रणाम।
Turaaj के द्वारा बताया गया है पूरी जिंदगी एक कविता की तरह ही लयबद्ध है। क्या हमने कभी इस जीवन की लयबद्धता के बारे में रोज-मर्रा  की आपा-धापी से थोड़ा समय निकालकर  सोचा है?
 
इस शरीर में साँसों की एक लयबद्धता है, हमें चाहे साँस लेने की याद न हो मगर साँस तो चल ही रही है। फिर शरीर के हर एक अंग में खून का लयबद्ध गति से चलना। हमारे खाने – पीने में, बोलने में, चलने में एक लय है जैसे एक संगीत में लय होती है, गीत के बोल में एक लय होती है, ताल की थाप में एक लय होती है। इसी तरह इन कविताओं में भी जीवन के आध्यात्मिक, मानसिक, शारीरिक,ओर सामाजिक स्तर को लयबद्ध करने का प्रयास किया गया है ताकि हम इन कविताओं के माध्यम से आत्म-चिंतन कर सकें ओर वह एहसास अपने अंतरतम में महसूस कर सकें जो जीवन का स्रोत है, ओर जिससे अंतरतम में जुड़कर हम सच्ची खुशी को पा सकते हैं। क्योंकि आज मन की अंधी दौड़ ने हमें बाहर संसार में इतना दौड़ा दिया है कि जो भी खुशी के साधन हमने समझे थे, जिनके लिये हम दौड़े थे, उनसे खुशी तो नहीं मिली बल्कि वो ओर हमारे दुख का कारण बन गए।

एक छोटे से बच्चे को उसके पालने में पड़े-पड़े मुस्कराते हुए हम सभी ने कभी न कभी देखा है। क्या कभी सोचा कि उसकी खुशी का कारण क्या है? वो है परम-चेतनता की अवस्था, जहां अभी मन की कामनाएँ पैदा नहीं हुई हैं, कोई विचार नहीं है, कोई कल्पनाएं नहीं हैं। अतीत-भविष्य की कोई चिंताएं नहीं है, अपने ओर पराये का एहसास नहीं है,बस एक चेतना हिलोरे मार रही है अपने शुद्धतम रूप में।

यही जीवन की टूटी हुई लयबद्धता को फिर से हमने जोड़ना है। परम-होश के जरिये, जहां मन भी है लेकिन अपने जीवन-धारा की याद भी है, उसका अनुभव भी है।

Turaaj की आशा है, इन कविताओं के माध्यम से हमें ये एहसास होगा की ये जीवन बहुत मूल्यवान है, ओर इसके मिलने का कोई उद्देश्य है, जिसकी हमें खोज करनी है।

    
Founder : Deepak Joshi
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