बुद्ध की प्रेरणा
“Buddha Motivation”
(Motivational Thoughts)
बुद्ध हम संसारी जीवों को प्रेरणा देते हैं कि जीने की सही राह चुननी चाहिए। संसार भोग विलास करने की जगह नहीं है क्योंकि यह सदा के लिए रहने वाला नहीं है। यह समस्त संसार अनित्य है। नाशवान है। इसकी कोई असलियत नहीं है। इसके प्यार में पड़ जाने का अर्थ है कि हम अग्यानी हैं। अ विद्या से ग्रसित हैं।
संसार सदा रहने की जगह नहीं है। यहां जीवन ऐसे ही है जैसे कोई व्यक्ति अपने घर से दूर शहर में जाता है और रात किसी सराय में, धर्मशाला में बिताता है। मगर वह उसे सदा के लिए अपना नहीं बनाता। वह सराय से अपना रिश्ता नहीं जोड़ लेता। कोई राग नहीं लगाता। कोई प्यार, लगाव नहीं रखता बल्कि सुबह होते ही सराय को छोड़ देता है।
मनुष्य का असली घर यहां नहीं बन सकता और नहीं वह यहां सदा के लिए रह ही सकता है। उसको अपने मुख्य उद्देश्य को नहीं भूलना चाहिए। उसे अपने असली घर को नहीं भूलना चाहिए।
क्या है उसका असली उद्देश्य? उसका उद्देश्य है कि वह समय रहते हुए अपने घर को लौट जाए। अपने मन को संसार से निकालकर सत्य, निर्वाण, मुक्ति की तरफ लगाए। संसार से राग, लगाव को त्यागकर इस भव बंधन से अपने को मुक्त करने का प्रयास करे।
यह मुक्ति किसी तथाता, किसी गुरु की शरण में जाकर उससे युक्ति लेकर सतत अभ्यास से होती है। दर बदर भटकते रहने से, किसी और व्यक्ति से मुक्ति की आशा रखना अमूल्य जन्म को बर्बाद करना है। क्योंकि बुद्ध कहते हैं कि “तथाता तुम्हें मार्ग दिखा सकता है मगर तुम्हारे लिए मार्ग पर चल नहीं सकता”।