प्यार की पहचान ही प्यार है “The hallmark of love is love (Hindi Poetry)

प्यार की पहचान ही प्यार है “The hallmark of love is love (Hindi Poetry)

प्यार की पहचान ही प्यार है

“The hallmark of love is love”

(Hindi Poetry)

 

जब दिल धड़कने लगे

किसी को देखकर

आंखें शर्माएं और

देखना भी चाहें

तो समझ लेना प्यार है….

 

 

बार बार चाह हो देखने की

बार बार चाह हो सुनने की

किसी के चेहरे से जब

नजर नहीं हटती

तो समझ लेना प्यार है….

 

 

प्यार के पंख नहीं दिखते

न बोल सुनाई देते हैं

मन उड़ानें भरता है और

आंखें बोलती हैं

तो समझ लेना प्यार है….

 

 

जब चेहरे पर मुस्कुराहट आने लगे

बेवजह कोई प्यारा लगने लगे

उसकी बेवकूफियां भी

मन को प्यारी लगने लगें

तो समझ लेना प्यार है….

 

 

प्यार बंदिश नहीं चाहता

न ही बांधा जाता है

जब घुटन सी होने लगे सीने में

बंधनों को तोड़ने का साहस जगे

तो समझ लेना प्यार है….

 

 

प्यार अंधा नहीं होता “तुराज़”

प्यार बहरा भी नहीं होता

प्यार प्यार ही देखता है

और प्यार प्यार ही सुनता है

तो समझ लेना प्यार है….

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"प्रेम" मुक्त-आकाश में उड़ती सुगंध की तरह होता है उसे किसी चार-दिवारी में कैद नहीं किया जा सकता। ~ तुराज़