अंजन
” Eye – Wash “
(Hindi Poetry)
निरर्थक स्वप्न सा जगत
सार्थक सत्य प्रतीत हो गर
समझ लो धूल नयन पर
अंजन की गहन है ….
विषयों में फंसा मन ग्रसित
भोग में, हर ले मति गर
समझ लो धूल नयन पर
अंजन की गहन है….
तृप्ति नहीं धावत दसों दिशाओं में
जुटा जुटाकर न भर सका
तन मन गर
समझ लो धूल नयन पर
अंजन की गहन है….
लपेटे सर्प की भांति माया, गर
तृष्णा नचावत ज्यों मदारीवश कपि,
तो समझ लो धूल नयन पर
अंजन की गहन है….
बुद्ध वचन,सत्संग शब्द, न भाएं
और गरियाए बुद्धों को गर
समझ लो धूल नयन पर
अंजन की गहन है (तुराज़)