आदित्य पर कविता “Poetry on Aditya “Sun” (Hindi Poetry)

आदित्य पर कविता “Poetry on Aditya “Sun” (Hindi Poetry)

आदित्य पर कविता

“Poetry on Aditya “Sun”

(Hindi Poetry)

सूरज को अब हम
भरी आंख से देखेंगे
धरती पर ही नहीं
अब हम उसके ही
घर में उसको देखेंगे

बहुत हुआ
“आदित्य” ने कहा
तुम तो आते ही हो
रोज जीवन बनकर
अब मैं तुम तक आता हूं

खूब शैर करेंगे
दिनकर की
थल में भी तुम हो
और नभ में भी
तुम हो
ब्रह्म तुम्हारा ही
पसारा है
धरती पर हर प्राणी को
तुम्हारा ही सहारा है
(तुराज़)..

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"प्रेम" मुक्त-आकाश में उड़ती सुगंध की तरह होता है उसे किसी चार-दिवारी में कैद नहीं किया जा सकता। ~ तुराज़