तुराज़ की शायरी -14, “Turaaz ki Shayari” (Hindi Poetry)

तुराज़ की शायरी -14, “Turaaz ki Shayari” (Hindi Poetry)

तुराज़ की शायरी -14

“Turaaz ki Shayari”

(Hindi Poetry)

मैं उन हालात पर
परेशान सा रहा
जिन्होंने ही तराशी
थी मेरी जिंदगी

आज नमन करता हूं
हर उस शख्स को
जिन्होंने कैसे थे तंज
जो बड़े तीखे थे मगर
आज उन्हीं से
संवर गई जिंदगी

हालत में सब कुछ
काला सा नजर आता है
ग्रहण में सूर्य और
चंद्र भी ढक जाता है
ऐसा ही कुछ जरूर
होता है जिंदगी में

जो समझा
और सीख गया
उसी ने संवारी
है ये जिंदगी
(तुराज़)

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"प्रेम" मुक्त-आकाश में उड़ती सुगंध की तरह होता है उसे किसी चार-दिवारी में कैद नहीं किया जा सकता। ~ तुराज़