अपेक्षा रुलाती है “Expectation makes you Cry” (Hindi Poetry)

अपेक्षा रुलाती है “Expectation makes you Cry” (Hindi Poetry)

अपेक्षा रुलाती है

“Expectation makes you Cry”

(Hindi Poetry)

 

 

अपेक्षा नामक अंधे कुएं का

मैंने बहुत नाम सुना था

जितना खोदो उतना ही

वह देते जाता है

ऐसा मैंने बहुत बार सुना था….

 

 

हर बार भर जाने की आकांक्षा रहती

भरते ही वह फिर चुक जाता था

अपना ही पूरा नहीं पड़ता

अपेक्षा दूसरों की कैसे भर पाता था….

 

 

मेरा ही अपना है जो बहुत अपेक्षित है

जितना भी खुश कर दो उसको

वह फिर भी दुखी उपेक्षित ही है….

 

 

अपेक्षा का न तो कोई नाम कहीं

ना कोई निशान कहीं

बस अपने से ही कोई चाहत है

जिसका कोई सर पावं नहीं….

 

 

कब तक कोई सहता जाएगा

एक दिन आंधी उठेगी सीने से

सब धुंधकार छा जाएगा

रिश्ते नाते, वह अपनापन

सब सूखे पत्तों जैसे उड़ जाएगा….

 

 

तब क्रोध उठेगा नए रूप में

सब पर भारी पड़ता जाएगा

रिश्ते नाते वह अपनेपन की बातें

कहां कोई कह पाएगा?

डर में यूं ही वह घुट जाएगा तुराज़…

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"प्रेम" मुक्त-आकाश में उड़ती सुगंध की तरह होता है उसे किसी चार-दिवारी में कैद नहीं किया जा सकता। ~ तुराज़