आदर और स्वीकार भाव : “Obedience and Acceptance” ( Motivational Thought)

आदर और स्वीकार भाव : “Obedience and Acceptance” ( Motivational Thought)

आदर और स्वीकार भाव

Obedience and Acceptance”

(Motivational Thought)

 

Obedience is love in action through the spirit of sacrifice. Even in family life, the most natural thing that keeps the family together, that nourishes family life is surrender to each other.
If there is not that obedience and surrender of the father and mother to each other, then how can they ask their children to be obedient?

आदर भाव, प्यार के इज़हार का और दूसरे के लिए कुर्बानी का एक तरीका है । यहां तक कि घर में भी एक दूसरे का आदर करने से ही हम सबके साथ मिलकर रह सकते हैं।
अगर मां – बाप के अंदर ही ऐसा आदर – भाव व स्वीकार – भाव नहीं है तो हम बच्चों से ऐसे आदर – भाव की उम्मीद कैसे कर सकते हैं !
मदर टेरेसा….

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"प्रेम" मुक्त-आकाश में उड़ती सुगंध की तरह होता है उसे किसी चार-दिवारी में कैद नहीं किया जा सकता। ~ तुराज़