मन के प्रभाव
“Impressions in the Mind”
(Buddha’s Message)
मन पर लगे प्रभावों के अनुसार ही हम अपनी जिंदगी चलाते हैं। जो प्रभाव ज्यादा हावी हैं उसी के अनुसार हमारी रोज की जिंदगी कार्य चल रहे हैं। इसीलिए नकारात्मक प्रभावों से और नकारात्मक कार्य किए जाते हैं और सकारात्मक प्रभावों से और अधिक सकारात्मक कार्य किए जाते हैं।
तभी तो बुद्ध कहते हैं कि भिक्षु कुशल कर्मों को करने वाला होता है क्योंकि कुशल कर्मों से वह और अधिक कुशल कर्म करता है और लोक कल्याण वर्ष कर्म करता है। इससे उसकी भावना ही बदल जाती है। और वह स्वभाविक ही अच्छा करता है। यही तो बुद्ध पुरुषों की क्रांति है मनुष्य की जिंदगी में। इसीलिए तो बुद्ध के उपदेशों की आवश्यकता है। उनकी सानिध्य की आवश्यकता है ताकि हमारे मन पर लगी परत हटे। नकार से सकार कर्मों का सिलसिला शुरू हो।
लेकिन मनुष्य की संसार में जरूरतें इतनी हैं कि वह उनको पूरा करने के वास्ते संसार में दौड़ भाग करता है। जब एक जरूरत पूरी भी हो जाती है तब तक वह दस और पाल लेता है और इसी तरह मृग तृष्णा वस दौड़ता रहता है। बुद्ध पुरुषों के मार्ग पर चलने के लिए उसके पास वक्त ही नहीं है। इसीलिए उसकी जिंदगी ऐसे ही दौड़ते दौड़ते कट जाती है। और उसे कोई अनुभव नहीं होता।