गर्भ कहां है जीवन का “Where is the Womb of Being” (Hindi Poetry) चूहेदानी चूहे के पीछे कब भागी है चूहा ही आता है, बेचारा फंस जाता है दुख ...
बुद्ध नहीं हूं मैं “I am not Buddha” (Hindi Poetry) शब्द हूं निशब्द गंतव्य है मेरा मन हूं मन के पार चले जाना है… रोग हूं रोगमुक्त होना ...
मन के प्रभाव “Impressions in the Mind” (Buddha’s Message) मन पर लगे प्रभावों के अनुसार ही हम अपनी जिंदगी चलाते हैं। जो प्रभाव ज्यादा हावी हैं उसी के अनुसार ...
आत्म-रुप में जीवन (Life in Self) Hindi Poetry जब आत्मा ही न हो तुममें तो तुम श्रृंगार करोगे कैसे कर भी लो भला तो तुम जचोगे कैसे गर ज्योति जगी ...