पत्थर दिल पत्थर “Stone Heart Stone” (Hindi Poetry)

पत्थर दिल पत्थर  “Stone Heart Stone” (Hindi Poetry)

पत्थर दिल पत्थर

“Stone Heart Stone”

 

(Hindi Poetry)

एक पत्थर से राह पर

मिला था मैं एक दिन

सहम सा गया था मैं

वह था बड़ा बेरहम…

उससे लगी ठोकर ने

मेरी छाती दहला दी थी दर्द से

मगर, वो बड़ा बेदर्द, बेरहम

पत्थर दिल निकला….

कोई आह नहीं निकली उससे

पर मेरी जान निकल गई

खून का फब्बारा निकला

नाखून और अंगुली

जैसे चूर चूर हो गई

मगर वह बड़ा बेदर्द, बेरहम

पत्थर दिल निकला….

वह बेदर्द टस से मस नहीं हुआ

और मैं दूर छटक गया

अपना पांव पकड़कर

बैठ गया

मगर वह बड़ा बेदर्द, बेरहम

पत्थर दिल निकला…….

मुंह से एक चीख निकली मेरे

कान जैसे सुन्न पड़ गए

गाल गरम हो गए

सर से तर तर

पसीना निकल गया

नाक और मुंह से

पानी टपक गया

मगर वह बड़ा बेदर्द, बेरहम

पत्थर दिल निकला……

करूं क्या, मुझे खबर नहीं

न मेरे पास कोई,

अनजान राह में

मैं अनजान राही था वहां

उसके सब जानकार

दरख़्त हैं, रोड़े हैं राह के

मैं अनजान तड़पता रहा दर्द से

मगर वह बड़ा बेदर्द, बेरहम

पत्थर दिल निकला…

 

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"प्रेम" मुक्त-आकाश में उड़ती सुगंध की तरह होता है उसे किसी चार-दिवारी में कैद नहीं किया जा सकता। ~ तुराज़