लम्हे
“Present Moment”
(तुराज़ की हिंदी कविताऐं)
लम्हों का क्या है
यह तो आते जाते रहते हैं
कुछ यादों में गम
कुछ खुशी दे जाते हैं
पर, लम्हे तो लम्हे ही हैं
यह तो आते जाते रहते हैं
इतना भी मत इतराओ
इन लम्हों में खो मत जाओ
तुम जब तक
मदहोशी से वापस आओगे
तब इनको
कहीं नहीं पाओगे
लम्हे तो लम्हे ही हैं
यह तो आते जाते रहते हैं
लम्हे कभी
बने नहीं किसी के
यह रुक नहीं सकते
यह तो नौकर हैं समय के
इनको तो चलना ही होगा
जब यह थम जाते हैं
तब जीवन भी रुक जाता है
लम्हे तो लम्हे ही हैं
यह तो आते जाते रहते हैं
जीवन रूपी दरिया पर
लम्हों का पुल होता है,
जन्म मरण का,
जब तक कोई लम्हा
चलता जाता है
मरण कहीं नहीं दिखता
लम्हे में ही लम्हा
फिसल जाता है
जन्म, मरण सा
दिखने लगता है
लम्हे तो लम्हे ही होते हैं
यही जन्म है पिछले सिरे में
यही मरण अंतिम सिरे में
एक ही समय को
जन्म मरण का
लम्हा कहते हैं
लम्हा कभी नहीं मरता
बस खिसकता ही जाता है
जिस जमीं से खिसका
वहीं मौत घटित हो जाती है
लम्हे तो लम्हे ही होते हैं
यह तो आते जाते रहते हैं
तुराज़…..
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