खुशी और संतोष : Happiness and Contentment ( Hindi Poetry)

खुशी और संतोष : Happiness and Contentment ( Hindi Poetry)

खुशी और संतोष

Happiness & Contentment”

(Hindi Poetry)

 

खुशी तो
बस खुशी होती है
कभी भी,
और कहीं भी होती है
न जेब में बंद
न कैद में किसी के
होती है, तो बस होती है।

क्या है,
क्या नहीं हाथ में
इसका उसको फर्क कहां
वह तो कंगाली में भी
हंसती है और खुश होती है।

सब अपेक्षाओं  का
खेल है यहां
फसल बोई हो अगर और
फल न लगें
तो खुशी कहां होती है।

जिसको
न जीवन चाहिए
और न मौत यहां
न अपनों से अपेक्षा
और न भगवान से यहां
वह तो बस है, सिर्फ है
उसको इसी से
खुशी होती है।

                                      “तुराज़”…..✍️

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"प्रेम" मुक्त-आकाश में उड़ती सुगंध की तरह होता है उसे किसी चार-दिवारी में कैद नहीं किया जा सकता। ~ तुराज़

6 comments

  1. Turaaz says:

    Thankyou so much,
    Due to reader like you, I am improving day by day .
    Thanks ❤️❤️🙏

  2. Turaaz says:

    Thankyou sir,
    It’s a great deal that I am getting overwhelming response from the reader’s.
    Which gives me strength toning to my work.
    With regards 🙏🙏❤️