जिंदगी पर कविता -4 (Hindi Poetry) निरुत्तर हूं और निशब्द भी जीवन को जीकर ही जानी मैंने जीवन की परिभाषा बहता नीर निर्मल सा जैसे दुग्ध – स्फटिक धारा हिम ...
जिंदगी पर कविता “Poetry on Life“ (Hindi Poetry) जिंदगी से मत पूछो जिंदगी की कहानी जो जी रहे हो, अभी जिंदगी इसी में छिपी है तुम्हारी सारी कहानी “जिंदगी”, किसी की ...