कल्पनाओं से यथार्थ तक (Dream to Reality) Story

कल्पनाओं से यथार्थ तक (Dream to Reality) Story

कल्पनाओं से यथार्थ तक

(पर्यावरण प्रेमी चंदन नयाल)

Story special

 

अगर वट वृक्ष को दुनियां में आना है तो लाज़मी है कि किसी नन्हे, अनजान और अस्तित्व विहीन से दिखने वाले बीज को धरा में दब कर गलना ही होगा,

बीज को भी कहां पता होता है कि उसके अंदर इतना विशालकाय वट वृक्ष छिपा है मगर उसकी कुर्बानी दुनियां के लिए पत्ते, फूल और फल तो देती ही है,मगर उससे भी अनमोल है मनुष्य जाति को दी जाने वाली जीवन दायिनी आक्सीजन, वर्षा,पथिक को दी जाने वाली छाया,और न जाने कितने कीट, पतंगों और पशुओं को दिये जाने वाला भोजन और शरण।

चंदन सिंह नयाल मधुर मुस्कान लिए, पतले दुबले, लचीला बदन, 25 – 30 वर्ष के, मधुरभाषी, शाकाहारी, और बहुत ही साधारण व नेक इंसान हैं। या कहें – एक ऐसा वट बीज, जिसके अंकुरित होने से दुनियां को एक नई सोच, नई दिशा, कर्मठता और कुछ कर दिखा देने का जज्बा मिलता है।

उनके दिल में, बड़ी बड़ी बातें, प्लानिंग और मीटिंग्स में सरकारी धन से किए गए भोजन और विलासता को कोई जगह नहीं बल्कि कुछ करके दिखा देने का जज्बा है। सोच है। नियत है।

आज हम जो भी जीवन का भोग कर रहे हैं इसकी भी बुनियाद का पत्थर कभी किसी ने हजारों साल पहले ऐसे ही रखा होगा जैसे की चंदन सिंह नयाल “पर्यावरण-प्रेमी” सोचते हैं।

जरा सोचें! उस वैज्ञानिक के बारे में, जिसने बिजली का आविष्कार किया। उसे तब भी पता था कि उसकी सोच से आने वाली पीढ़ी को बाहरी अंधकार से निजात मिल सकती है। मगर तब व्यक्ति अंधकार में था। विकसित नहीं था। शायद इसीलिए उस वैज्ञानिक का मजाक और खिल्ली भी कहीं उड़ी हो! क्योंकि युग कोई भी हो। साधारणतया इंसान की जड़ता कभी खत्म नहीं होती। तब यह बात महज सपना थी मगर आज यह बात सच साबित हुई है।

विरोध बल भी देता है। अपने लक्ष्य-पथ पर मजबूती और दृढ़ता से चलने के लिए सहज ही ईंधन का काम भी करता है। 

 

पुरुस्कार व सम्मान

मैंने जो देखा वह यही है कि जैसे-जैसे चंदन नयाल को सराहना मिली, भारत के प्रधानमंत्री माननीय श्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा “मन की बात” कार्यक्रम में उनके नाम का और कार्य का जिक्र किया गया । भारत सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा दिल्ली में विज्ञान भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में “जल संरक्षण करने पर” पुरुष्कार से नवाजा गया, उत्तराखंड राज्य सरकार के वन विभाग, व अन्य कई स्वयं सेवी संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत किया गया वैसे वैसे ही मानो सुबह का उगता सूरज किसी बादल के टुकड़े की ओट में था और अचानक ही रश्मि पुंज बन चमक उठा और देश की कोटि कोटि जनता के लिए प्रेरणा का एक स्रोत भी बन गया। 

हालांकि चंदन नयाल का कहना है कि वह किसी इनाम या उपहार के लिए यह सब नहीं कर रहे हैं बल्कि आने वाली पीढ़ी के प्रति उनकी एक जवाबदेही भी है और उनके लिए एक मिसाल भी है कि वह भी इस मुहिम को ऐसे ही आगे बढ़ाएंगे और प्रकृति को संरक्षित करेंगे।

हां, जब कोई व्यक्ति या संस्था मिलने आती है या बुलाती है। सम्मान देती है। उपहार देती है तो अच्छा लगता है और मन को खुशी भी मिलती है। होंसला भी बड़ता है । मगर यह मेरा उद्देश्य नहीं है। मुझे तो मेरा काम करना ही है”।

 

जब भी कोई व्यक्ति किसी जीव को जीवन देता है। प्रकृति को सहयोग करता है। उस समय प्रकृति की नजरों में वह मां की ममता लिए और निराकार परमात्मा की साकार प्रतिमा होता है। प्रकृति ऐसे व्यक्ति को सर्वरूपेण सहयोग देकर धन्यता का अनुभव करती है। और वह व्यक्ति प्रकृति के हित और निस्वार्थ में किए गए अपने सभी कार्यों में सफलता प्राप्त करता चला जाता है। उनका शाकाहारी होना इस बात का प्रतीक भी है कि कोई प्रकृति प्रेमी कैसे जीव की हत्या करके खा सकता है?

 

गांव तक सड़क निर्माण का कार्य

भीमताल, पदमपुरी, धारी, शहर फाटक, भीड़ापानी होते हुए हम सुदूर के नयाली गांव पहुंचे। मुख्य मार्ग से लगभग 3 – 4 किलोमीटर कच्ची सड़क में ढलान में उतरने के बाद हम चंदन सिंह नयाल के गांव पहुंचे।

मालूम हुआ की यह कच्ची सड़क भी गांव वालों के श्रम दान और वर्तमान विधायक द्वारा दी गई अल्प मदद का नतीजा थी। अब तक लोग अपनी फसल, फल, और सब्जियां खुद ही सिर पर रखकर मुख्य मार्ग तक पहुंचाते थे। लेकिन जब वहां से हमारी गाड़ी गुजरी तो हमारे रोंगटे खड़े हो गए। ऐसा लगता था कि यह गाड़ी कभी भी पलट जाएगी।

चंदन नयाल और गांव वालों के श्रम से रोड तो बनी मगर अभी वाहनों के लिए बिल्कुल ही अपर्याप्त! जो एक बहुत बड़ा खतरा बना हुआ है। और न ही डामरीकरण हो पाया है।

मगर चंदन नयाल को पूरा विश्वास है कि उनके युवा कर्मठ स्थानीय विधायक के प्रयास द्वारा जल्द ही यह रोड का कार्य संपन्न होगा । क्योंकि यह रोड जो लगभग 7-8 किलोमीटर की है। आगे चलकर 6 – 7 और सुदूर गावों को जोड़ती है। जिनसे लगभग 400 से 500 लोग मुख्य धारा से जुड़ सकेंगे। और जो आज उन्हें बेसिक सुविधाओं से वंचित रहना पड़ता है, वह भी मुहैया हो सकेंगी।

चंदन  नयाल पॉलीटेक्निक की पढ़ाई करने के बाद पूरी तरह से प्रकृति को बचाने के काम में लग गए हैं। उनका कहना है कि एक ईश्वरीय शक्ति उनके साथ है जिसने उनकी सोच पूरी तरह से बदल दी और उनको हर कार्य में सहयोग दे रही है।

चंदन कहते हैं कि पढ़ाई के दौरान जब भी में घर आता था तो जंगलों में आग लगी होती थी और में अपने पापा के साथ आग बुझाने जाता था। लेकिन धीरे धीरे मुझे ये बात चुभने लगी कि जिस कुदरत ने हमें जीवन दिया है। जिसके सहारे हम सांस ले रहे हैं। उस धरोहर को अगर हम नहीं बचा पाए तो हमारा यह जीवन फिर किस काम का!

इसी सोच के बाद चंदन ने फैसला कर लिया की वह अब पेड़ भी लगाएंगे। जंगल भी बचाएंगे। और जल संरक्षण भी करेंगे ताकि पानी के प्राकृतिक स्रोत जो सुख चुके हैं उनको फिर से पुर्नजीवित भी किया जा सकेगा और प्रदूषण रूपी अजगर जो इस पूरी दुनियां को अपने मुंह में समेटने चला है उसको भी मारा जा सकेगा।

 

पर्यावरण प्रेमी की नर्सरी एवम व्रक्ष्यारोपण 

चंदन नयाल की बांज और देवदार के पेड़ों की नर्सरी देखने का हमें मौका मिला। अपने घर के पास ही अपनी जमीन में उन्होंने हजारों की संख्या में पोंध लगाई हैं जिनको वह समय आने पर जंगलों में जाकर लगाएंगे। उन्होंने जिला स्तर पर, ब्लॉक स्तर पर, ग्राम स्तर पर और स्कूलों के जरिए पेड़ लगाने का काम भी किया और लोगों को जागरूक भी किया।

चंदन सिंह अब तक 50 से 60 हजार पेड़ लगा चुके हैं। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में वह काफल, तिमिल, मेहो, बेडू, कचनार, जैसे कई और जंगली फलों वाले पेड़ लगाएंगे ताकि मनुष्य के साथ साथ पक्षियों और जंगली पशुओं को भी भोजन मिलता रहे और वह हमारे घरों की तरफ आकर जो नुकसान करते हैं उनसे भी बचा जा सके।

चंदन सिंह कहते हैं कि यह बात इतनी मूल्यवान नहीं कि आपने कितने पेड़ लगाए बल्कि मूल्यवान यह है कि आपने एक-एक पेड़ को बच्चे की तरह पाला, पोषा और संरक्षित किया। पेड़ तो वन विभाग भी हर साल लगाता है मगर दुर्भाग्य यह है कि उनकी परवरिश करने वाला धाय-मां की तरह बहुत लापरवाह और निर्लज्ज होता है। और क दो साल के बाद वह जंगल में लगी आग के चपेट में आकर बचपन में ही दम तोड़ देते हैं।

 

चंदन नयाल कहते हैं कि मैं अपने लगाए एक-एक पेड़ को देखने जाता हूं। सुबह और शाम को जब जानवरों का तार बाड़ के अंदर घुसने का वक्त होता है मैं उनको जाकर भगाता हूं।

चंदन नयाल ने अभी बांज, देवदार, ब्रास, काफल, मेहू, दाड़ीम, कचनार, अखरोट और कई किस्म के पेड़ अपने घर के पास ही लगभग 12 हेक्टर के जंगल में लगाए हैं।

 

जल संरक्षण का कार्य

जल संरक्षण की एक विशेष मुहिम चंदन सिंह नयाल ने चलाई है। जंगलों में ऊंचाई वाले समतल जगहों पर उन्होंने बड़े बड़े चालखाल बनाए हैं। जिनमें 4 से 5 हजार लीटर तक पानी जमा होगा जो धीरे धीरे जमीन में जाएगा। इससे एक ओर जहां हमारे पानी के स्रोत दुबारा से पुनर्जीवित होंगे वहीं दूसरी ओर जंगल में नमी भी बनी रहेगी जिससे जो नए पेड़ लगाए हैं उनको पानी भी मिलता रहेगा और नमी के कारण आग फैलने का खतरा भी कम रहेगा।

इसके अलावा पहाड़ी का वो इलाका जो समतल नहीं है उनमें खंपतियां बनाई हैं ताकि बारिश का पानी जब पहाड़ी से ढलान में उतरेगा तो इनमें रुकेगा और धीरे धीरे पानी जमीन के अंदर जाएगा। जब वर्षा का पानी रुकेगा तो उससे तराई इलाकों में बाड़ का खतरा भी कम होगा। अभी वर्तमान में बारिश का पानी पहाड़ी से बहकर मैदानों में वेग के साथ बाढ़ का रूप ले लेता है जिसकी संभावना अब कम हो जाएगी।

अब तक चंदन नयाल जंगलों में लगभग 3000 चालखाल, खंपतियां, और पोखर बना चुके हैं।

चंदन नयाल ने उत्तराखंड में एक पर्यावरण प्रेमी के रूप में लोगों को प्रेरित भी किया है और उनके दिल में अपनी एक विशेष जगह भी बनाई है।

आज चंदन सिंह नयाल को कई गावों के लोगों का सहयोग भी मिलता है और सराहना भी।

यहां तक की समय समय पर वन विभाग के अलग अलग रेंज के ऑफिसर , प्रतिनिधि मंडल और एन. जी.ओ. चंदन सिंह नयाल से मुलाकात कर उनकी होंसला अफजाई भी करते रहते हैं।

 

 

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"प्रेम" मुक्त-आकाश में उड़ती सुगंध की तरह होता है उसे किसी चार-दिवारी में कैद नहीं किया जा सकता। ~ तुराज़

2 comments

  1. Turaaz says:

    आपकी हौंसला अफजाई मुझे और अच्छा लिखने को प्रेरित करती है। मेरी कोशिश हमेशा यही रहती है कि सच लोगों तक पहुंचाया जाए और मनुष्य की आत्मा जाग्रत हो सके।
    आपका बहुत बहुत धन्यवाद 🙏🙏🌹