चेतन, अचेतन मन व सपने : “Conscious, Sub conscious and Super Conscious Mind” & Dream ( Part-1 )

चेतन, अचेतन मन व सपने : “Conscious, Sub conscious and Super Conscious Mind” & Dream ( Part-1 )

चेतन,अचेतन व सचेतन मन के प्रभाव व सपने

Conscious,Sub conscious and Super Conscious Mind’s effects and Dreams” (Part-1)
(Story Special)
बच्चे के मन की एकाग्रता ( Child Mind’s Observation)
 
बागेश्वर उत्तराखंड राज्य का एक पौराणिक तीर्थ स्थल जिसका इतिहास हजारों वर्ष पुराना है। नैनीताल से 250 किलोमीटर आगे चलकर  बसी ये घाटी, बहुत ही दर्शनीय ओर मनमोहक है। सरयू और गोमती नदियों के संगम तट पर भगवान बागनाथ जी का प्राचीन मंदिर है जिसके नाम पर ही इस स्थल का नाम बागेश्वर पड़ा। बागेश्वर शहर से लगभग 4 मील खड़ी पहाड़ी पर चढ़ने के बाद एक गाँव है “जौलकांडे”, जहां मैंने अपने बचपन के वो 8 साल बिताये हैं जिसमें कि एक बच्चे का पूरा दिमाग (Brain) विकसित हो जाता है। ये मेरी नानी का घर था । जहां परिवार के 12 सदस्य रहते थे । इस परिवार में मेरे अलावा दो और छोटे बच्चे थे। एक लगभग 6 महीने का ओर एक 2 साल का। मेरी उम्र लगभग 8 साल की थी।
 
नवजात शिशु का मन
रोज़ जब घर के लोग खेतों पर चले जाते तो मेरी ड्यूटी लगाई गई थी कि मैं इन दोनों बच्चों की देखभाल करूँ। उस समय मैंने जो देखा और सीखा वह में आपको बता रहा हूँ। ये हर मनुष्य के चेतन ओर अचेतन मन की बात है। छोटा बच्चा जब भी सोकर उठता था में उसको पिसाब कराता shu….. shu…. shu…. की आवाज़ से उसने सम्बन्ध (association) जोड़ लिया था, फिर मैं  शहद वाली चुसनी उसके मुंह में लगा देता। अगर वह रोता तो उसको दूध की बोतल दे देता। धीरे-धीरे ये बच्चा मेरी उपस्थिति (presence) को महसूस करने लगा। यहां तक कि जब कभी उसकी मां घर के काम  कर रही होती तो वह मेरे अलावा और किसी के साथ नहीं रहता था । कई बार मेरी नानी उसको अपनी छाती से लगा लेती अपने स्तन से दूध पिलाने की कोशिश करती लेकिन वह महसूस कर लेता की ये मेरी माँ नहीं है। क्योँकि मां के स्तन से वह जन्म के पहले दिन से ही जुड़ा हुआ है। कई बार जंगली बिल्ली, कुत्ता या बंदर भी आ जाते लेकिन ये सब उस बच्चे के पास जाकर बैठ जाते और उसको देखते रहते लेकिन ये बच्चा  उनसे डरता नहीं था। जबकि दूसरा बच्चा जो 2 साल का था वह इनसे डरता भी था और अक्सर डंडे से जानवरों को भगाता भी था।
 
बच्चे के मन का नकल करना
जो बड़ा बच्चा है कई बार उसको पॉटी आ जाती तो वह मेरे से कहता था कि निक्कर खोल दो और दूर आंगन के कोने में जाकर करता था। अक्सर ही अगर मुझे जरा सा भी देर हो गई तो वह दोनों हाथों से अपनी पॉटी को जमीन में लिपाई सी कर देता। दर असल ये इस बच्चे ने अपनी माँ को देखा था कि वह हर हफ्ते गोबर और मिट्टी से आंगन को लीपती है  और इसी की वह नकल कर रहा था। घर के आसपास अनार के पेड़ हैं। जब अनार के पेड़ में फूल आ जाते तो वह रोज़ पूछता कि अनार कब आऐंगे ? वह रोज़ ही उन फूलों को दिन में कई बार देखता रहता। मैं उसको कहता था कि भगवान को बोलो की अनार जल्दी लगा दो तो अब वह रोज़-रोज़ पेड़ के नीचे हाथ जोड़कर भगवान को कहता था कि जल्दी से अनार दे दो।
 
बच्चे के मन का सुचनाओं को महसूस करना
आपने देखा कि किस तरह से ये जीवन का खेल प्रारम्भ होता है। मनुष्य का पूरा जीवन उसके चेतन मन द्वारा सूचना लेने-देने से चलता है और अगर इसमें कहीं भी कोई विघ्न आ गया तो फिर अनेक प्रकार की कठिनाइयां शुरू हो जाती हैं ।
इस 6 महीने के छोटे से बच्चे को अपने माँ के स्तनों का आभास होता है क्यों कि पैदा होते से ही वह इनसे दूध पी रहा है।
 दूसरा उसने पिसाब करने को या पॉटी करने को shu.. shu…. आवाज से जोड़ लिया है।  एक और महत्वपूर्ण बात कि बिल्ली, कुत्ते और बंदर से उसको कोई भय नहीं है क्योंकि उसके अचेतन मन के पास इन जानवरों के संबंध में कोई भी प्रभाव अभी तक नहीं पड़े हैं । जबकि बड़े बच्चे के अचेतन मन में  इनके संबंध में प्रभाव पड़ चुके हैं कि कैसे घर के बड़े लोग जब भी बंदर आ जाते हैं तो उनको भगाते हैं, ये बंदर कैसे रिएक्शन करते हैं, ये इसने देख लिया है । हालांकि इसने अभी कोई किताब नहीं पढ़ी है इनके संबंध में ।और दूसरी बात कि इसको डराया भी गया है कि ये काट लेते हैं इसीलिए ये अब डरने भी लगा है  और  अपने चेतन मन (conscious mind) के द्वारा निर्णय लेकर डंडे से उनको भगा भी रहा है।
 
एक बात जो हमें समझनी होगी ताकि आगे हम इस विषय को अच्छे से समझ पाएं , वह ये कि मनुष्य यहां पैदा होने के बाद से ही हर एक वस्तु व हर एक घटना से प्रभाव ले रहा है चाहे वह उससे संबंधित (associated) हो या न हो। ये प्रभाव वह सबसे पहले हमारी पाँचों ज्ञानेन्द्रियों ( देखना, सुनना, सूंघना, स्पर्श, व स्वाद ) से ले रहा है।  फिर पांच कर्मेन्द्रियाँ हैं, फिर अंतःकरण हैं, इन सभी से वह प्रभाव लेता है और ये सभी प्रभाव उसके अचेतन मन में संचित होते जाते हैं । इसकी विस्तृत चर्चा हम आगे “मन के प्रभाव” में करेंगे।
ऊपर के उदाहरण में ये छोटा बच्चा अभी मात्र 6 महीने का ही है लेकिन उसे अपनी माँ के स्पर्श का आभास हो गया है और अब तो वह मेरे स्पर्श को भी महसूस करने लगा है।
यही एक मात्र कारण है कि हर बच्चे को स्कूल में तस्वीरों का सहारा लेकर पढ़ाया जाता है ताकि वह उस अक्षर का उस तस्वीर को देखकर सम्बंध जोड़ सके। हम सारी जिंदगी इसी तरह सीखते हैं।
दूसरी बात ये कि चेतन मन कर्ता है(doer) वह अचेतन मन में रखी सुचनाओं और प्रभावों (stored information) के सहारे तुरंत निर्णय लेता है। जिसको हम साधारणतया अनुभव (experience) कहते हैं।
मनुष्य के अचेतन मन में जो भी जानकारी रखी हुई है उसकी याद उसको लगातार उसके अंदर उठ रहे भाव और विचारों के माध्यम से प्रकट होती है । यही कारण है कोई भी घटना बीत जाने के बाद उससे  संबंधित विचार व प्रभाव (Thought and Impression) बहुत प्रबल होते हैं और हम इन विचारों और प्रवाहों में ही अपने चेतन मन को फँसाये रखते हैं और वर्तमान परिस्थिति से बेखबर हो जाते हैं इसी को हमने “मन की शांति के सूत्र” में बहुत विस्तार से देखा है।
चेतन मन पर और बात करने से पहले इन भाव, विचार  और प्रभावों को भी समझ लेते हैं ताकि हमें चेतन मन, व अचेतन मन को समझने में आसानी हो।
 
भाव (Emotion)
भाव का अर्थ है मन के अंदर की एक  स्थिति, जिसमें से बहुत सारे उसी भाव से संबंधित विचारों की तरंगें उठ रही हैं लेकिन यह भाव भी कई प्रकार के होते हैं जैसे, कभी प्यार का भाव उठता है, कभी गुस्से का भाव उठता है, कभी नफरत का भाव उठता है, कभी ईर्ष्या-द्वेष का भाव उठता है आदि।
यह भांति-भांति के भाव ऐसे ही हैं जैसे  समुन्द्र में एक लहर उठती है फिर उससे जुड़ी हुई दूसरी लहर और फिर उससे जुड़ी हुई तीसरी लहर, ये लगातार चौबीसों घंटे उठते रहते हैं।
ये भाव कभी बिल्कुल अंदर अंतःकरण में दबे हुए होते हैं , बाहर इनका जरा भी पता नहीं लगता और कभी इतने प्रत्यक्ष होते हैं कि स्पष्ट दिखाई देते हैं , जैसे किसी के डांटने से आंसू आ जाना, मुंह से चीख निकल पड़ना आदि।
ये भाव अलग-अलग दशाओं और परिस्थितियों में कभी शरीर के जरिये ओर कभी मन के जरिये प्रकट होते हैं।
इंसान में ही नहीं जानवरों में भी ये भाव आसानी से महसूस किए जा सकते हैं साधारणतया जब वह प्रतिरोध करते हैं।
भाव-दशाएं उम्र के साथ, शारीरिक और मानसिक स्तर पर बदलाव और उसकी सोच-समझ के दायरे के बढ़ने के साथ ही बदलती भी रहती हैं। कुछ भाव जन्म से ही हैं  जैसे रोना, पालने में मुस्काना, हाथ-पांव पटकना, क्योंकि अभी उसके पास भाषा नहीं है व्यक्त करने के लिये और कुछ ये यहां जिंदगी के अनुभवों और प्रभावों के साथ इकट्ठे करता है।
 
मन का प्रभाओं को पकड़ना
हमारा मन जो अनगिनत तरीकों से प्रभावों को पकड़ता है जिसका हम अंदाज़ा भी नहीं लगा सकते और ये अचेतन मन में संचित होते जाते हैं।
 चेतन मन के प्रभाव हैं जैसे मैं TV में कोई प्रोग्राम देख रहा हूँ तो मेरे दोनों मन चेतन भी ओर अचेतन भी काम कर रहे हैं। चेतन मन उन चीजों को पकड़ रहा है जो में बिल्कुल नया देख रहा हूँ और अचेतन मन उनको पुराने प्रभावों से जोड़ रहा है और एक श्रृंखला सी बनती चली जाती है जिस बारे में  हम आगे विस्तार से चर्चा करेंगे।
कितना आश्चर्य है ये जीवन का कि हमें जो ये शरीर दिखाई दे रहा है सब कुछ करते हुए, ये कहीं और से ही चलाया जा रहा है उसी तरह जैसे घर में  हम TV चलाते हैं वो चलते हुए दिखता है मगर उसके पीछे remote काम कर रहा है और यही नहीं रिमोट के पीछे केबल कनेक्शन काम कर रहा है और यही नहीं उसके पीछे रिले करने वाले यंत्र काम कर रहे हैं और इनके साथ ही बैटरी या बिजली काम कर रही है। ये सब जुड़े हुए हैं, मगर कुछ हमें इन आँखों से दिखाई दे रहे हैं और कुछ हमें नहीं दिखाई दे रहे हैं ।
इसी तरह ये शरीर भी चल रहा है, हमें ये दिखाई दे रहा है, हम कुछ न कुछ करते हुए भी दिख रहे हैं लेकिन हमें वो रिमोट नहीं दिख रहा है जो आदेश दे रहा है। हालांकि कभी-कभी थोड़ा सा होश में बने रहने से ये एहसास होता है कि ये अंदर से मन कह रहा था तो मैंने कर दिया, लेकिन ये मन कौन है और ये क्यों कह रहा था, इसको कहाँ से पता चल रहा है इस पर हम आगे चर्चा करेंगे।
 
चेतन मन:- ( Conscious Mind )
 
चेतन मन वह अवस्था है जब हम कुछ भी करते समय जागरूक हैं । हमें पता है कि हम ये कर रहे हैं हालांकि होता यह है कि मैं जो कर रहा हूँ मैं बिना होश पकड़े हुए सोये-सोये कर रहा होता हूँ यानि मुझे ये तो पता है कि मैं ये काम कर रहा हूँ मगर करते समय मेरा ध्यान मेरा ख्याल कई और विचारों में भी गया हुआ होता है। और मैं  काम को कर भी देता हूँ एक आदत की तरह या कहें एक मशीन की तरह, लेकिन में असल में किसी विचार के साथ कहीं और ही होता हूँ।
इसलिए जिसको मैं चेतन मन कह रहा हूँ उसमें मुझे होश है काम करने का । इस पर हमने मन की शांति के सूत्र में डिटेल मेंं चर्चा की है।
 
अचेतन मन:- ( Sub conscious Mind)
 
अचेतन मन लगातार हमारे अंदर चल रहा है और वह हमारे जागने पर ही नहीं सोये में भी काम कर रहा है। आप चेतन अवस्था में कुछ भी कर रहे हों मगर आपको  पुराने अनुभव व सूचनाएं देना उसकी जिम्मवारी है जो कि आपके अंदर स्टोर है लेकिन आपको पता भी नहीं है।
ये आप बार-बार  पढ़ेंगे आगे भी, कि अचेतन मन सूचनाएं देता है लेकिन आप सोचोगे कि हमने तो सूचना ,  कभी माँगी ही नहीं । इसका आपको एहसास भी नहीं होता है । जब आप कहते हो कि ये पिंक शर्ट है , आप क्या सोचते हो ये आपने अपने से कह दिया ! नहीं आपको तो पता भी नहीं चला कि आपके शर्ट को देखने तक आपके अचेतन मन ने आपको ये बता दिया है कि ये पिंक है, इसमें लाइनें हैं, ये इस ब्रांड की लगती है, ऐसी शर्ट आपने कब पहनी थी, और न जाने क्या-क्या। ये सब बिजली की तरह होता है।
जो हमारे दिमाग में न्यूरॉन हैं वो इन सूचनाओं को चुम्बकीय तरंगों के माध्यम से चेतन मन को देते और लेते रहते हैं ।
 
अचेतन मन यादास्त नहीं है (sub conscious Mind is not memory)
लेकिन ख्याल रखना कि ये मात्र यादास्त ही नहीं है। कहीं आप कहो ये तो यादास्त है। अंतर समझो अचेतन मन में सब स्टोर है आप उसको याद कर पाओ या नहीं। जैसे पिंक colour की बात हमने ऊपर की, ये आपने बचपन में स्टोर कर लिया है कि ये पिंक है। अब आप 70 साल के हो गए हो और आपको कोई पिंक शर्ट देता है तो आपको लगता तो है कि ये देखा है लेकिन आपसे आपकी पोती आकर पूछती है कि ये कौन सा colour है आप कहते हो याद नहीं आ रहा। इसका क्या मतलब है?  कि अब आपके पास सूचना तो है लेकिन आपके न्यूरॉन जो की चुम्बकीय विद्युत तरंगों ( Electro magnetic waves) के जरिये सूचनाएँ लाने और ले जाने का काम करते हैं वो उम्र या किसी ओर कारण से कमजोर पढ़ चुके हैं इसलिये ये सूचना आपको तुरंत नहीं मिल पा रही है लेकिन “पिंक शर्ट” ये सूचना आपके अचेतन मन ( sub conscious Mind) के पास है। और अक्सर होता है कि बाद में जब कभी भी आप शांत होते हैं , विचार कम होते हैं आपको वो चीज अचानक से याद आ जाती है।
 अचेतन मन ( sub conscious Mind)  हमारे जागे होने की अवस्था में भी सारी गतिविधियां जो भी आस-पास में हो रही हैं उनको महसूस करके संचित ( Store) भी कर रहा है, ये सूचनाएं ऐसे नहीं ले रहा है जैसे कि आप चेतन मन से चुनाव करते हो , जैसे कि ये गंदा है, ये अच्छा है, ये नेगेटिव है, ये पॉजिटिव है।
 
अचेतन मन “सही-गलत” नहीं जानता Sub conscious Mind doesn’t know good and bad, right and wrong)
अचेतन मन ऐसे ही है जैसे आप वीडियोग्राफी करते हैं तो क्या होता है, जो कुछ भी चल रहा है जहां आपने फोकस किया है , जैसे कोई कीड़ा चल रहा है,कहीं कुत्ता भौंक रहा है उसकी आवाज, हवा बह रही है उसकी आवाज़, कोई बात कर रहा आसपास उसकी आवाज़, दूर पेड़ दिख रहे हैं , कहीं अच्छा पड़ा है, कहीं खराब पड़ा है, मतलब कि , उसका कोई चुनाव नहीं है। उसने तो सब स्टोर कर लेना है ।
 क्योंकि हम तो चेतन मन ( Conscious Mind) के साथ कुछ और काम कर रहे हैं। जैसे उदाहरण के लिए मैं किसी के साथ मीटिंग
कर रहा हूँ, बात करते हुए मेरा अचेतन मन सूचना दे रहा है कि इसकी आवाज आपके पड़ोसी से मिलती है, इसकी नाक आपके भाई की जैसी है, इसकी राइटिंग आपके कॉलेज के दोस्त से बहुत मिलती है आदि।
सोचो ! क्या आप ये देखने के लिए गए थे ? नहीं
इसी तरह इसने उस मीटिंग के जगह की सारी चीजों को जैसे दीवाल का रंग, कुर्सियां , उस जगह  को संबंधित (Corelate) कर लिया है, और जो बिल्कुल नई चीज है उसको भी इसने स्टोर कर लिया है। आपने चाहे उस तरफ ध्यान दिया हो या नहीं लेकिन सब कुछ रिकॉर्ड हो गया है।
 बड़े मजे की बात यह है कि आपको खुद भी पता नहीं है कि इतना सब कुछ हो गया है। आपको पता तब लगेगा जब भी कभी भविष्य में वो स्थिति आएगी जब ये आपको संबंधित सूचना पेश कर देगा तब आप चेतन मन से याद करने की कोशिश करोगे तो वो तस्वीरें आपके आंखों के आगे आ जायेंगी और ये भी  याद आ जायेगा की ये तो उस मीटिंग में देखा था।
अगर अचेतन मन की सूचनाएँ आप तक न पहुंच पाएँ तो इसका अर्थ है कि न्यूरो सिस्टम में कोई कमी आ रही है जिसको हम यादास्त का कम हो जाना कहते हैं।
 
दिमाग की चुम्बकीय तरंगों द्वारा सुचनाओं का आदान-प्रदान
दरअसल जैसा कि ऊपर बताया गया कि अचेतन मन जो कि सभी सूचनाओं का भंडार है अपनी सूचनाओं को चुम्बकीय तरंगों के जरिये लेता और देता रहता है और ये चुम्बकीय तरंगें हमारे दिमाग में न्यूरॉन के जरिये पैदा होती हैं और ये न्यूरॉन हमारे ब्रेन में करोड़ों की संख्या में हैं जो सूचनाओं को एकत्रित करते रहते  हैं और एक प्रकार के रसायन का इस्तेमाल करते हैं ताकि चुम्बकीय तरंगें ( Megnetic Waves) सुचारू रूप से काम करती रहें। इस रसायन(chemical) का जो मुख्य भाग है उसी को हम ओमेगा-3(Omega) कहते हैं । ये बहुत ही सीमित मात्रा में होता है और इसका उपयोग हमारे न्यूरो तकनीक द्वारा सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए किया जाता है और जब भी मनुष्य अनावश्यक भावों विचारों और सूचनाओं  में उलझा रहता है तो ये ओमेगा रसायन का अनावश्यक ही उपयोग हो जाता है और ऐसा व्यक्ति का दिमाग ( Mind)  कमजोर होने लगता है और धीरे-धीरे उसकी दिमागीय स्थिति खराब होने लगती है। आजकल की इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में मनुष्य अनावश्यक सूचनाओं,व घटनाओं में इसका उपयोग करने लगा है और उसकी मनोस्थिति ( Mental State) पर इसका प्रभाव साफ दिखाई देने लगा है। साधारणतया एक उम्र के बाद ये स्वत् ही कम हो जाता है और दिमाग शिथिल पड़ने लगता है। जैसे-जैसे मन की तरेंगें बढ़ेंगी वैसे-वैसे इस रसायन का उपभोग भी बढ़ जायेगा।
अगर अचेतन मन ( Sub conscious Mind)  की सूचनाओं  को आप अच्छे से नहीं इस्तेमाल कर पा रहे हैं तो इसका अर्थ है कि आपका चेतन मन ( Conscious Mind)  पूरी तरह होश में नहीं है, जो हम सबके साथ होता है।
आगे की चर्चा हम पार्ट – 2 में करेंगे कि किस तरह से मन की आदतों  को नहीं समझ पाने से हमारे रातों की नींद उड़ जाती है, सपने आते हैं और पूरा सोने के बाद भी शरीर मे कोई ऊर्जा  नहीं दिखाई देती।
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"प्रेम" मुक्त-आकाश में उड़ती सुगंध की तरह होता है उसे किसी चार-दिवारी में कैद नहीं किया जा सकता। ~ तुराज़

4 comments

  1. Turaaz says:

    It’s my pleasure to write my feelings and experiences about life in totality,
    You are valuable reader who gives me strength and immense confidence to write my work in better way.
    Thankyou
    With regards 🙏❤️