हर कर्म में कुदरत साथ है “Nature always with us” (Motivational Thoughts)

हर कर्म में कुदरत साथ है “Nature always with us” (Motivational Thoughts)

हर कर्म में कुदरत साथ है

“Nature always with us”

(Motivational Thoughts)

 

जो हम पाना चाहते हैं, सारा ब्रह्मांड उसको हम तक पहुंचाने के लिए हमारी सहायता करने में लग जाता है। जरूरत है कि हम पहला कदम उठाएं!

 

जो भी विचार हमारे मस्तिष्क में उठता है वह कोई मात्र विचार ही नहीं है बल्कि हमारी संभावनाएं हैं। उस विचार में हमारी जड़ें हैं जो हमें अनंत तक फैला सकती हैं।

 

कुदरत को कोई नहीं लेना देना कि तुम्हारे विचार सकारात्मक हैं या नकारात्मक। कुदरत तो तुम्हारे विचार के हिसाब से रास्ते बनाने लगती है कि किस तरह इस विचार को करनी में बदल दिया जाए।

 

यह हमारे ऊपर ही निर्भर करता है कि हमारे अंदर किस तरह का विचार उठता है उसी से हमारी नियति बन जाती है और जो विचार उठता है वह हमारे ही अंदर लगे संस्कारों का परिणाम है।

 

संस्कार और कर्म जैसे किए होंगे वही आगे का रास्ता भी बनाते जाते हैं क्योंकि फिर वैसे ही कृत्य करने के लिए विचार उठते हैं और फिर वैसा ही कृत्य हो जाता है।

 

इसलिए मनुष्य को अपना हर कृत्य बहुत ही सोच समझकर करना चाहिए।

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"प्रेम" मुक्त-आकाश में उड़ती सुगंध की तरह होता है उसे किसी चार-दिवारी में कैद नहीं किया जा सकता। ~ तुराज़