तुराज़ की शायरी -16 “Turaaz ki Shayari” (Hindi Poetry)

तुराज़ की शायरी -16 “Turaaz ki Shayari” (Hindi Poetry)

तुराज़ की शायरी -16

“Turaaz ki Shayari”

(Hindi Poetry)

एहसास हो गमों का गर तुम्हें

तो बच लीजिए “जनाब”

जमाने में ये गम फ्री में

मिला करते हैं…

 

 

हर कोई ही निकलता है

रोज कुछ कमाने के खातिर

हमने भी कुछ ऐसी ही

आदतें पाली है

हम तो खुशियां कमाने जाते हैं

गमों को गले लगा, ले आते हैं…..

 

 

खुशियां उधार नहीं मिलती “जनाब”

कुछ गमों का सौदा है

जो समझता है खुशियां ही खुशियां

मिलेंगी जहां में

उन्होंने कभी खिलते गुलाब नहीं देखे हैं…

 

 

 

पूछ कर देखना कभी किसी गुलाब से

दास्तान ए जिन्दगी

कांटों से भी मिलके रहने की

अदाएं उन्हीं ने सीखी हैं…..

तुराज़….

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"प्रेम" मुक्त-आकाश में उड़ती सुगंध की तरह होता है उसे किसी चार-दिवारी में कैद नहीं किया जा सकता। ~ तुराज़