आदमी की अहमियत : “The Value of Presence” (Hindi Poetry)

आदमी की अहमियत : “The Value of Presence” (Hindi Poetry)

आदमी के होने की अहमियत

The Value of Presence”

(Hindi Poetry)

आदमी का होना ही
अहम होता है
जब वह नहीं होता है
तब होने का भाव
पता होता है
आदमी का होना ही
अहम होता है।

जब वह होता है
कभी अच्छा लगता है
कभी बुरा भी लगता है
आदतें अच्छी हों
तो दिखती ही नहीं
और बुरी हों तो बहुत चुभती हैं
पर जो भी हो
आदमी का होना ही
अहम होता है।

रोज़ मिलते हैं, दिखते हैं,
संग रहते हैं
कभी हंसते हैं
और कभी रोते हैं
प्यार-तकरार, लड़ाई-झगड़ा,
मार-पिटाई
सब सहन करना पड़ता है
वह है !
तभी तो यह सब होता है
जब नहीं होता है तब
कहां ये सब होता है
आदमी का होना ही
अहम होता है।

कोई चंद घंटों के लिए
तो कोई दिनों, वर्षों के लिए
कुछ जीवन भर के लिए
ऐसे ही मिलते हैं जिंदगी में
फिर जब चले जाते हैं
अच्छे हों या बुरे
बहुत याद आते हैं, क्योंकि
आदमी का होना ही
अहम होता है।

जरा याद करो उनको
जो अब नहीं हैं
वह कुर्सी, वह चारपाई,
वह सोफा, वह घर
आज भी वहीं है
पर उसमें
अब कोई बैठा नहीं है
अब किसे लाकर बिठाओगे?
इसीलिए सब कुछ
सहन करना होता है, क्योंकि
आदमी का होना ही
अहम होता है।

मत करो ज्यादा बातें,
थोड़ा दूरी ही सही पर
सह लीजिए, सुन लीजिए,
कहीं आप गलत हैं, कहीं वह सही
कुछ जुड़ा हुआ होता है
तभी तो कोई मिलता है
सब ऐसे ही, थोड़े ही होता है

यह जीवन है!
यहां सब जुड़ा हुआ होता है
सबकुछ निभाना होता है
कहीं मानना और कहीं
मनाना होता है
जब वह नहीं होता है
तब खोने का गम होता है
क्योंकि आदमी का होना ही
अहम होता है।
तुराज़…….✍️

 

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"प्रेम" मुक्त-आकाश में उड़ती सुगंध की तरह होता है उसे किसी चार-दिवारी में कैद नहीं किया जा सकता। ~ तुराज़

2 comments

  1. Turaaz says:

    Thnx ❤️ 🙏
    Dear Reader
    Your prompt response gives me a driving force to write more.
    Regards
    🙏🙏