बुद्ध नहीं हूं मैं “I am not Buddha” (Hindi Poetry)

बुद्ध नहीं हूं मैं “I am not Buddha” (Hindi Poetry)

बुद्ध नहीं हूं मैं

“I am not Buddha”

(Hindi Poetry)

शब्द हूं

निशब्द गंतव्य है मेरा

 मन हूं

मन के पार चले जाना है…

 

 

रोग हूं

रोगमुक्त होना चाहता हूं

दुख नियति है अगर

दुख मुक्ति ही मंजिल है मेरी….

 

 

 

धरती पर ठहर कर

अक्सर आसमां को देखता हूं मैं

डगर पर चलते ही जाना होगा

थिर बैठ जाना

जीवन की नियति कहां….

 

 

 

बुद्ध नहीं हूं मैं

मगर तड़प प्राणों में गहरी है

पंचशील जीवन में उतरे

सदा प्रयासरत हूं मैं ….

 

 

 

हर बार गिरा हूं

सत्य की खोज में

पर मुझे संतोष नहीं इस जीवन से

मुझे तो शरण लेनी ही होगी

संकल्प बिना सिद्धि कहां….

 

 

 

राग, द्वेष, आशा, तृष्णा

यही आधार हैं मेरे जीवन के

मैं नहीं चाहता इन्हीं से

बुना हो कफ़न भी मेरा….

 

 

 

मैं मरूं

मृत्यु को देखता रहूं

उसका साक्षात करूं

यही सच्ची कमाई है कुल

मानव जीवन की….

        (तुराज)

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"प्रेम" मुक्त-आकाश में उड़ती सुगंध की तरह होता है उसे किसी चार-दिवारी में कैद नहीं किया जा सकता। ~ तुराज़